आई
Submitted By: Tanuja vinayak kawale
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आई ..कशी गेलीस मज सोडुनी अमुचे जीवन अपुरे ठेवुनी | अर्थ नसे जगास तुज वाचुनी आता कशे राहू आम्ही तुझ्या वाचुनी || तुज वाचून माजी घुसमट होई येना आई मजपाशी परतूनी | तुज वीण हृदय ही आता शांत होई कशी थांबवू डोळना रडण्या पासूनी|| कशी पाखरा सारखी गेलीस उडुनी एकदा बघ ना आई त्या ढगा आडूनी | किती करू तुज साठी देवाकडे विनवणी कधी येशील आमच्या पाशी परतूनी || येना आई एकदा परतूनी.. येना आई एकदा परतूनी...
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Reg ID: BF25-5502
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