कान्हा मेरे
Submitted By: Swati Basanaik Bharamanaikar
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कान्हा इतने मनमोहक, श्याम वर्ण छवि, गहरे-निले ऑख, की खो जाए सारा संसार।। तुम्हारे कारनामे इतने महान, अनंत नाम से अनंत पहॅचान। गोकुल में दैत्यो और मथुरा में कंस का संहार।। व्दारका की प्रतिष्ठापना। रणक्षेत्र में अर्जुन के सारथी बन, भगवत् गीता का उपदेश दिया, कर्म, धर्म और जिवन ज्ञान दिया।। स्मरण तुम्हारा, सभी सुख-दुख में। साथ तुम्हारा, कर्म के हिसाब से। ओह! प्यारे माखन चोर मेरे, हो तुम पुरे विश्व के दुलारे।। प्रिय तुम बिन सब कुछ अधुरा, केवल उस दिन की प्रतीक्षा धूरा, राधे-राधे जप में, तुम्हें समर्पित हो जाॅऊ।
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Reg ID: BF25-5501
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