Submission 3813

ए जिंदगी

Submitted By: Eshan Asif Pendhari

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आजमालें ए जिंदगी मुझे पता नहीं जमाना आखिर मुझसे क्या चाहता है ऐसा क्या दिखता हैं ए खुदा तुझे मुझमें जब उसको अपने पास रखना ही हैं तो क्यों हर रोज मुझे रुलाना चाहता हैं उसकी यादों से अभी उभरही रहा था फिर उसके सपने दिखकर फिरसे याद दिलाना चाहता हैं पर याद रख एक दिन इस तरह जाऊंगा ये लोग क्या याद रखेंगे मुझे कुछ इस तरह दुनिया छोड़ आऊंगा अक्सर याद आता है मुझे वोह मंजर के किस तरह मैं उसे पाना चाहता था पता था उसे भी की मैं नहीं जाने दूंगा उसे वो भी कमबख्त इस तरह दिल लगा बैठा जो मेरी जिंदगी की कदर कर बैठा

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Reg ID: BF25-5860

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