Submission 3337

वो कागज की कश्ती

Submitted By: तारिक नसीम

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वो कागज की कश्ती यो कागज की कस्तो हर दिलों में बसती। वो काले बादल की तम्तरी, आसमान में बस्ती। जब होती है वर्षा, हर एक चेहरे पर लाती है ह वो वर्षों का पानी, आगे आई बाबों की नादानी। बच्चों के हाथों से करीबिगड़ती रंग-बिरंगा करती। वो कागज को करती, हर दिलों में बसती। सुनी करती की कहानी, मेरी जुबानी। कागज के टुकड़ों से बनती संवरती यह आए-बहार, कागज के करती पर लाए निखार। पानी के मौजों से बचती-बचाती यह बढ़ती चली जाती आगे ही आगे बचपन भी भागे आगे ही आगे यह आगे फिर कहते, में तेरी है कश्ती, ये मेरी है करती करते ही रहते बच्चे वे मरती वो कागज की कशी, हर दिलों में बसती। खोला गया वो गुम होता गया वो कहाँ है वो बचपन कहाँ है वो साथी, कागज की कशी गो बारिश का पानी, वो कागज की कश्ती, जो हर दिलों में बली।

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Reg ID: BF25-5675

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