बनारस सा एहसास
Submitted By: Priya Mishra
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सुनो, मुझे बनारस बहुत पसंद है... जहाँ भीड़ में भी, घाटों की शांति साथ चलती है। जहाँ की तंग गलियों में भी, प्यारी सी मुस्कान बसी होती है। क्या तुम मेरे लिए बनारस सा एहसास बन सकते हो? भीड़ में भी घाटों सा शांत साथ बन सकते हो? गलियों में बसे अपनापन की तरह, मेरा हाथ थाम सकते हो? मैं तुम्हारे लिए विश्वनाथ धाम सा अडिग सुकून बन सकती हूं। गंगा आरती सा पवित्र जुनून बन सकती हूं। इस अनजानी सी भीड़ में,जब हर शोर खुद में खो जाए। क्या तुम मेरे लिए कभी न खोने वाला, बनारस सा एहसास बन सकते हो? बनारस सा, एहसास बन सकते हो???
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Reg ID: BF25-5601
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