मूर्तियों से खून नहीं बहता, पर मुझसे बहता है
Submitted By: Rathod Leesa kalidas
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मूर्तियों में खून नहीं है, पूजा में आँसू नहीं हैं। मूर्तियों के हाथ में शक्ति नहीं है, फिर भी हम उनमें जीवन देखते हैं। मूर्तियों के पीछे एक कहानी है, एक इतिहास है, एक सपना है। मूर्तियों में बसते हैं हमारे सपने, हमारी आशाएं, हमारे विश्वास। मूर्तियों को हम पूजते हैं, क्योंकि वे हमें प्रेरित करती हैं। मूर्तियों में नहीं है खून, लेकिन वे हमें जीवन का अर्थ सिखाती हैं। मूर्तियों के पीछे एक भावना है, एक प्रेम है, एक श्रद्धा है। मूर्तियों में नहीं है जीवन, फिर भी वे हमें जीवन का मर्म समझाती हैं। मूर्तियों की पूजा में है हमारे दिल की गहराई।
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Reg ID: BF25-5585
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