कान्हा माया ऐसी रचाए
Submitted By: Pradyumna Wani
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जिसके जन्म से पहले उसके अपने ही उसकी मौत का षडयंत्र रचाए जन्म होते ही कालकोठरी की बेड़िया खुलके राह दिखाए कान्हा माया ऐसी रचाए कान्हा को मिट्टी खात देख मैया दौड़ी चली आए नन्हा सा मुख खोल मैया को ब्रह्मांड दर्शन कराए कान्हा माया ऐसी रचाए संसार के चक्रव्यू मैं फसे अर्जून को पर्थ बनने की राह दिखाए सारथी बन रथ सम्भाल गीता का पाठ पढ़ाए कान्हा माया ऐसी रचाए कभी राम बन वाली को छुपके मारा अगले ही जन्म जरा रुपी वाली से अपना मरण स्वीकारा कर्म का खेला ऐसा खुद भगवंत भी न बच पाए माया से मुक्त होने कान्हा स्वयम माया ऐसी रचाए
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Reg ID: BF25-5578
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