Submission 3039

दूसरी बेटी

Submitted By: Karishma desai

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दुसरी बी बेटी दूसरा संतान बेटी हो तो बी खुश होते माँ बाप लेकिन परिवार को रेहे एके बेटे का स्वार्थ बोलने को तो है बेटा बेटी समान फ़िर भी रहता है एक बेटे का स्वार्थ! पहली बेटी घी में रोटी बोल कर खूब लुटाते है प्यार पहला बच्चा है क्या बेटा क्या बेटी बोलता है समाज जब दूसरी बार बेटी हो तो ताने बी मारे वाही समाज बोलने वाले तो कुछ बी बोल जाते हैं उस माँ से पूछो जो जलम देति है माँ को दोनो बच्चे समान! दूसरी बेटी को प्यार न कर सके तो न करो पर उसकी हिम्मत न तोड़ो पहले ही समाज के तानो से है परीशन क्या होवा घर का दिया ना हो सकी क्या पता हो आपका घर बन कर रहे जाए!

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Reg ID: BF25-5542

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