Submission 3010

बेटी vs खोकला समाज .....!!!

Submitted By: Roopali Goankar

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अपनी बेटी सोने समान होती है। और दूसरों की बेटी के फ्यूचर पर सवाल उठाने वाला यही खोकला समाज है... अनपढ तो अनपढ, यहाँ पढ़े-लिखे भी उसी गैर ज़िम्मेदारी के मोहताज़ हैं... जहाँ देश हमारा कहता रहता है .... बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ.... पर जब पढ़े-लिखे होकर इस खोकले समाज की कुछ अनिष्ट रुढ़ियाँ... परंपराओं पर सवाल उठते हैं... तो यही समाज कहता है, “ये बड़े बुज़ुर्ग जो कह गए वही समाज है”... 4 लोग 4 बातें... इन नियमों पर ...... हर किसी की ज़िंदगी की नाव डूब रही है। बेटियों को उनके मंज़िल की राहों में उड़ने दो... उनके उड़ान में अगर मदद कर सको तो उनके ताक़तवर पंख बनो, न कि उनके पंखों को काटने वाले निर्दयी इंसान के हाथ...

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Reg ID: BF25-5528

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