किताब का आख़िरी पन्ना
Submitted By: Suzain Mugatakhan
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आख़िरी पन्ना धीरे से पलटता है, मानो साँस कोई विदाई भरता है। स्याही की खुशबू में छिपा दर्द, यादों का समंदर उतरता है। शब्दों की लौ अब बुझने लगी, हाशियों पर खामोशी गुनगुनाने लगी। पर इस सन्नाटे के पार कहीं, भोर की किरणें मुस्कराने लगीं। कठिन है छोड़ना वो कहानी प्यारी, जिसने दिल को दी थी रोशनी सारी। पर हर अंत बहती हुई धारा है, जो नए सागर की ओर इशारा है। इसलिए किताब मैं बंद कर दूँ, ना ग़म से, ना आँसू भर दूँ। हर विदाई नया रास्ता दिखाता है
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Reg ID: BF25-5485
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