कुछ खास नहीं बदला है
Submitted By: Dr Jaishri Veeragoudar
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तुम्हारा मुझे छोड़ जाने के बाद कुछ खास नहीं बदला है,पर, जो मुस्कुराहट मेरे होठों पर आसानी से आ जाया करती थी उसके लिए अब काफी मुशक्कत करनी पड़ती है। हाँ कुछ खास नहीं बदला है । अच्छे कपडे पहन कर आज भी अपनी तस्वीर खिंचवाती हूं लोग तारीफ भी करते हैं पर, कान ये सुनने को तरसते हैं कि तुम पर ये रंग ज्यादा खिलता हाँ कुछ खास नहीं बदला है । फ़ोन की घंटी दिन में आज भी कई बार बजती है पर, स्क्रीन पर मेरी नजरें तुम्हारा नाम ढूंढती हैं। हाँ कुछ खास नहीं बदला है । मैं कविताएं आज भी लिखती हूं और तारिफें आज भी बटोरती हूं पर, सुनना है कि तुम आसान शब्दों में क्यों नहीं लिखती कुछ समझ नहीं आया हाँ कुछ खास नहीं बदला है । तुम्हारे लिए लिखी कविता तुम्हें भेज भी नहीं सकती मालूम है तुम जवाब में एक इमोजी भेज दोगे और फिर तुम्हारी वहीं लंबी खामोशी और हाँ कुछ खास नहीं बदला है । तुम्हारी जय
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