बोलती खामोशी
Submitted By: Tuba Zareen Fatima
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भीड़ से घबराते , भीड़ में घबराते खुशनुमा फिज़ाओं में रंगीन अंधेरी रह गई एक बात कहनी रह गई। चुन चुन कर हर मोती को चमकाया हर आंसू को कोशिश करके हीरा बनाया उनकी उड़ानों को करीब से देखने की हिम्मत जुटाते – जुटाते , वो वहीं की वहीं खड़ी रह गई एक बात कहनी रह गई । जब आखिरकार उस लम्हे से पहली–आखरी मुलाक़ात हुई मन में शब्द बुनते–बुनते , वो घड़ी बह गई एक बात कहनी रह गई एक बात कहनी रह गई।।
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Reg ID: BF25-5757
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