Submission 2611

तलाश में में अपनी

Submitted By: Divya Suresh shinge

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तलाश में मैं अपनी , जहाँ कही भटक जाती हूँ। अपनी खुशी के तलाश में, बार बार कही खो जाती हूँ। सबको अपना दिल और प्यार देकर, फिर अपने दिल के तलाश में रहती हूँ। यादे बिक्री पढ़ी होती है, पर मैं समेटने लग जाती हूँ। भीड़ में भी कही रेहकर, खुदको अकेला पाती हूँ। जीन सवालो के कोई जवाब नहीं, उन जवाबो के तलाश में रहती हूँ I अब मैं लोगो के नहीं, सुकून के तलाश मैं रहती हूँI

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Reg ID: BF25-5352

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