Submission 3486

वो मखमली शाम और तेरा मेरा मिलना।

Submitted By: Sakshi Arun Dongare

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मखमली शाम में तेरे साथ होना, तेरा हाथ पकड़ के तेरे साथ चलना। कुछ न कहना, बस चुपचाप आँखों से तेरी बातें करना। जी करता है तुझे अपने पास रख लूं, किताबों की तरह पढूं तुझे, मेरी सबसे पहली कविता की तरह। अपनी आदत बनालूं तुझे हर रोज़ शाम की चाय की तरह। आसमां की तरह चाहूं तुझे और चाँद सा प्यार करूं। महसूस करूं तुझे बारिश की पहली बूंद की तरह, गाने की धुन की तरह तुझे गुनगुनाऊं मैं। तुझे समेट लूं और हसीन लम्हों का पिटारा बनाऊं। तुझसे मिल के ऐसा लगता है जैसे खुशियों से रूबरू हुई है मेरी रूह। जैसे खुद से मुलाकात हुई है, जैसे बेरंग सी जिंदगी में रंगों की बरसात हुई है।

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Reg ID: BF25-5744

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