Submission 3444

इंतजार

Submitted By: Ishaan Bhutani

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उतने ही बड़े हैं हम जितना छोटा हमें दुनिया मानती उतने ही बड़े हैं हम जितना छोटा हमें दुनिया मानती दुनिया कहती तुम्हें क्या‌ इल्म प्रेम का? दुनिया कहती तुम्हें क्या‌ इल्म प्रेम का? परन्तु वह यह नहीं जानती कि हमें भी ज्ञान है- प्यार किस चिड़िया का नाम है तभी तो अनजाने में दिल‌ शायद किसी की याद में रोता है शायद इस लिए ही वह उस दुःख को किसी के इंतजार में हमेशा ही ढोता है।

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Reg ID: BF25-5719

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