अव्वाज़
Submitted By: Aryavart Singh
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लिख रही हूं आज मैं जो पढ़ूंगी सालों बाद मैं , दिल मेरा फिर से वही कहेगा कि इसे लिखा था कल ही रात में. कोन भूला पाएगा उसे बेदर्द याद को कोन भुला पाएगा हमें खोफनाक बात को कि बेफिक्र होकर चली थी एक घर की बेटी आज बन के रह गई है एक इतिहास जो अगर कोन इन्हें इंसान बुलाता है जो हर मासूम पर अपनी आग बुझाता है आज का दिन तो किसी तरह की काट वी लू मेरा ख्याल तो मुझे कल का सताता है.
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Reg ID: BF25-5685
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