Submission 3299

एक नया सफर

Submitted By: MRUNALI RAKESH BHOI

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निकले हैं एक नए सफर पर। अपनों से दूर, सपनों के थोड़ा क़रीब। घर को छोड़ एक नई दुनिया में, ख़ुद से ख़ुद की पहचान कराने। आवारा से भटकते, दुनिया को नए नज़रिए से देखने। यादों से भरा हुआ झोला साथ लेकर, मन में थोड़ी सी उलझन, बहुत सारे ख्वाब लेकर। रुकावटों से भरा होगा ये सफर, हर एक मोड़ पे एक नई चुनौती होगी। थक जाऊँ चलते-चलते जब ,याद आत है घर तब । याद आते हैं अपनों के साथ गुज़ारे हुए वो पल, याद आते हैं वो यार, जिनसे होती थीं बातें चार, समेट कर इनही यादों को, निकले हैं एक नए सफ़र पर।

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Reg ID: BF25-5653

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