दिल की पहेली
Submitted By: Bhoomi 'M' Sungar
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दिल के दरवाज़े पर है,खटखटा के बोलू या, अंधर ही रह जाउ?, ख्याल है कह देने का पर न जाने मैं क्यू डरू, ये पागलपन समझता ही नहीं है कि ये मोह भीतो हो सकता है, काश मेरे हाथ दूसरे दरवाज़े की चाबी होती और मैं उस पार चली जाती,सोचते सोचते लम्हे निकल गए पर ये पहेली ना सुलझ सकी। ये दिल है दरमिया इसे कभी पागल, आवारा, आजाद, बेशरम कहने लगे.... ना एक लब्ज़ टहर सका और पहेली किसिसे न सुलझ सकी.
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Reg ID: BF25-5648
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