प्रकृति में बदलाव
Submitted By: ROUSHAN KUMAR
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।। मिल गई आजादी अग्रेजों से, पर बीमारियों से कब मिल पाएगी सभी ने मिलकर देखा है स्वच्छ भारत का सपना, न जाने यह कब पूरा हो पाएगी; वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण ये मानव के शर्महीन काम इन कामों ने पूरे विश्व में दिल्ली को कर दिया बदनाम; माँ गंगा भी रूठ गई, निर्मल धारा छुट गई बड़े-बड़े वनों की हो गई कटाई, फिर भी मनुष्य को अक्ल न आई; पहले बहती थी नदियों की धारा, अब है सिर्फ नल-जल सहारा बहती थी प्रकृति में प्रदूषण मुक्त हवाए, लेकिन अब रह गया सिर्फ ऑक्सीजन पाइप का सहारा फिर भी प्रकृति ने सहे कष्ट हजार, छीन लिए उसके वन कतार खड़े कर दिए महल अपार, अंत में हो गई प्रकृति आशा की हार; अचानक प्रकृति ने अपना भयानक रूप दिखाई, बाढ़ संग सूखा ,तूफान भी लाई फिर भी मनुष्य को ये बात समझ न आई, कि प्रकृति ने ऐसा रूप क्यों दिखाई ।।
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Reg ID: BF25-5617
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