Submission 2081

पिंजरा

Submitted By: RISHU

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तुम आज़ाद किसी कोकिल से, मैं बुलबुल पिंजरे की कैद में | तुम ऊंचे किसी पर्वत से, मैं बहती नदियों की धार में | तुम अंग्रेजी किताबे पढ़ने वाले, मैं शायरा तुम्हारे इश्क में | तुम किसी ख्वाब से, मैं जीती रही हकीकत में | तुम महफ़िलों में रहने वाले, मैं अकेली उमर गुज़ार लू तुम्हारी याद में | तुम आज़ाद खुले आसमान से, मैं क़ैद तुम्हारे इश्क़ में | तुम आज़ादी के प्रेमी प्रिये, मुझे इश्क है इस क़ैद से ||

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Reg ID: BF25-5165

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