Submission 1603

बाप

Submitted By: Mirkar Khushi Prakash

----------------------------------

हमें अपने हाथों से निवाला खिलाने वाली माँ तो सबको याद रहती है, पर घर में राशन भरने वाला बाप कभी किसी को नज़र नहीं आता, कान्हा को जनने वाली माँ देवकी सबको याद है पर उन्हें यमुना पार करlने वाले वसुदेव हमें याद नहीं, आँखों में समंदर ले फिरता है पर आंसू एक न गिर|ता है, छुपाके अपने जज़्बातों को आहें अकेले भर लेता है, के ज़िक्र नहीं किया उसने अपने घावों का कभी, परिवार की खुशी में ही अपना मरहम ढूंढ लेता है, दिख जाते हैं माँ के आंसू मगर, बाप का गिला तकिया न दिखता है, अकेले में दुनिया से दूर सिसकियाँ ले वो रोता है, वो न हो तो सारा घर ताश के पत्तों की तरह बिखरता है |

----------------------------------

Reg ID: BF25-5065

Please Note - You can vote only Once. If you have already voted - the voting will be disabled automatically by the system.

264
Votes
962
Views
11 Months
Since posted

VOTING Closed on Nov 30, 2025!

Scroll to Top