जिन्दगी की किताब
Submitted By: Mamta kumari
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ज़िंदगी की किताब में हर पन्ना कुछ कहता है, कहीं हँसी की गूँज है तो कहीं आँसुओं सा बहता है। कभी मिलती है मंज़िल पास ही किसी मोड़ पर, तो कभी रास्तों में काँटों का कारवाँ रहता है। कभी सुकून के पल चुपके से गले लग जाते हैं, तो कभी रातें अकेलेपन की चुभन से सहम जाती हैं। कभी अपनों का साथ दिल को आशियाना बना देता है, तो कभी वही दूरियाँ दिल को वीराना बना देती हैं। ख़ुशियाँ और ग़म, चैन और मुश्किलें—सब सफ़र का हिस्सा हैं, हर पन्ने में एक सबक है, हर लम्हे में कोई किस्सा है। इसलिए मुस्कुराकर जी लो जो लिखा है किस्मत की स्याही में, क्योंकि ज़िंदगी की किताब में हर रंग का अपना ही एक किस्सा है
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