तुम
Submitted By: Akarsh Anand Krishu
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तुम्हारी छोटी सी बिंदी, झुमके, नोज पिन, कलाई से लगी बड़ी-बड़ी चूड़ियां, ये देह से लगी साड़ी और श्रृंगार अक्सर प्यार की प्रगाढ़ता दर्शाती हैं, लेकिन शायद ये तुम्हारी पवित्रता को दर्शाती है। पवित्रता जो संसार से परे है, पवित्रता जो किसी शब्दार्थ के अधीन नहीं, पवित्रता जो तुमसे मुझमें आ रही है और अपने संग मुझे बहा ले जा रही है। तुम्हारी नेल पेंट शीतल मन को चंचल बना रही है, जैसे गंगा-यमुना का चंचल संगम। हर प्रेमी या प्रेमिका अपने प्रिय की आँखों को चाँद, तारों और अनगिनत प्यारे-प्यारे उपनाम देते हैं, जैसे प्रिय की आँखों में भोपाल की झीलों जैसी शीतलता हो। लेकिन ये तुम्हारी आँखें किसी उपनाम/रूपक की मोहताज नहीं। अगर मेरा बस चले तो धरती की सबसे खूबसूरत चीजों को तुम्हारी इन आँखों का रूपक दे दूं। तुम्हारे ये खुले बाल, इन्हें देख कैसे कोई अपने शब्दों को न भूल जाए, कैसे न खुद को भूल जाए, कोई कैसे इन्हें ना संवारे, कैसे कोई न बस इन्हीं में खो जाए। और तुम, बस तुम, अनंत तुम।
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Reg ID: BF25-5576
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